फैला दसों दिशाओं में जितना प्रकाश है
हर मन में जो बसा है उसी का
प्रकाश है
भ्रम दूर कर न पाये वो
खद्योत भी नहीं
आँखों को खोल दे वो ही सच्चा प्रकाश है
इक रंग तो बताओ जो अनुराग
में नहीं
इक मात्र ये ही रंग रँगीला प्रकाश है
असहाय व्यक्ति के लिए तो धूप
भी है धुन्ध
जब कष्ट में हो कोई तो करुणा प्रकाश है
जैसे ही नैन मूँदे तो इक जोत
सी जली
जब उसकी बात हो तो अँधेरा प्रकाश है
आँखों को खोल दे वो ही सच्चा प्रकाश है
इक मात्र ये ही रंग रँगीला प्रकाश है
जब कष्ट में हो कोई तो करुणा प्रकाश है
जब उसकी बात हो तो अँधेरा प्रकाश है
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