हाँ ये स्वीकार कर रहे हैं हम
तुम नहीं हो तो डर रहे हैं
हम
कल कहा था कि तुम पराये हो
आज फिर से मुकर रहे हैं हम
स्वप्न है यह कि वास्तविकता
है
आपकी माँग भर रहे हैं हम
केतकी का पराग हैं हम लोग
अन्तसों में उतर रहे हैं हम
मात्र इतनी सी पीर है मन की
डूबना था, उभर रहे हैं हम
बिन्दु बनकर जगत में आये थे
उत्तरोत्तर सँवर रहे हैं हम
केतकी का पराग अर्थात केवड़े
की सुगन्ध जिसे खाने पीने की वस्तुओं में मिला देने से उन का स्वाद बढ़ जाता है; उत्तरोत्तर
– क्रमशः,
लगातार
आज फिर से मुकर रहे हैं हम
आपकी माँग भर रहे हैं हम
अन्तसों में उतर रहे हैं हम
डूबना था, उभर रहे हैं हम
उत्तरोत्तर सँवर रहे हैं हम
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