परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

Tuesday, 9 June 2026

हाँ ये स्वीकार कर रहे हैं हम

 हाँ ये स्वीकार कर रहे हैं हम
तुम नहीं हो तो डर रहे हैं हम
 
कल कहा था कि तुम पराये हो 
आज फिर से मुकर रहे हैं हम 
 
स्वप्न है यह कि वास्तविकता है
आपकी माँग भर रहे हैं हम
 
केतकी का पराग हैं हम लोग
अन्तसों में उतर रहे हैं हम
 
मात्र इतनी सी पीर है मन की
डूबना था, उभर रहे हैं हम
 
बिन्दु बनकर जगत में आये थे
उत्तरोत्तर सँवर रहे हैं हम
 
केतकी का पराग अर्थात केवड़े की सुगन्ध जिसे खाने पीने की वस्तुओं में मिला देने से उन का स्वाद बढ़ जाता है; उत्तरोत्तर क्रमशः, लगातार

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