रुष्ट क्यों हैं,
आपको सूचित किया तो था
ध्येय को, मन्तव्य
को ज्ञापित किया तो था
क्या पता पुरवाई या पछुआ
निगल गयी
इन्द्र ने मेघों को निर्वासित किया तो था
ये भले ही पूर्वजों का हो
किया-धरा
शक्ति ने सामर्थ्य को शोषित किया तो था
मित्र कैसे छप गयीं इतनी
अशुद्धियाँ
मान्यवर ने ग्रन्थ सम्पादित किया तो था
तन्त्र की अवहेलना करने लगा
पुनः
न्याय ने उद्दण्ड को दण्डित किया तो था
इन्द्र ने मेघों को निर्वासित किया तो था
शक्ति ने सामर्थ्य को शोषित किया तो था
मान्यवर ने ग्रन्थ सम्पादित किया तो था
न्याय ने उद्दण्ड को दण्डित किया तो था
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