लाड़ली बेटी सुनो तुम मात्र लैला ही नहीं हो,
तुम सुभद्रा, आम्रपाली,
पद्मिनी भी हो
बस तुहिन-कण ही नहीं हो, बस झमाझम ही नहीं हो,
तुम हिमालय की सुता
मन्दाकिनी भी हो
द्रौपदी, तारा,
अहिल्या, रुक्मिणी, मन्दोदरी या
मन्थरा, कैकेइ तक ही क्यों रहो सीमित
तुम महाकाली, भवानी, चण्डिका, दुर्गा, शिवानी,
काल की भी काल तुम कात्यायिनी भी हो
तुम समय को भूलकर भी छूट
इतनी दे न देना
ताकि वह भ्रमजाल बुनकर तुमको उलझा ले
दुष्ट का संहार करना किन्तु कर्कश हो न जाना
तुम स्वरों की स्रोत वीणावादिनी भी हो
ताल में सहगामिनी हो चाल में
गजगामिनी हो
शून्य के प्रासाद की सौदामिनी, लाड़ो
काम के सेवक की हो तुम यदि सनातन-सेविका तो
कामना रूपी महल की स्वामिनी भी हो
वास्तविकता तो यही है हर अटल
के दो पटल हैं
जो उदय होता है उस का अस्त निश्चित है
मेरी प्यारी, लाड़ली तुम भोर तो ही जगत की,
किन्तु उस के साथ में ही
यामिनी भी हो
बस तुहिन-कण ही नहीं हो, बस झमाझम ही नहीं हो,
मन्थरा, कैकेइ तक ही क्यों रहो सीमित
तुम महाकाली, भवानी, चण्डिका, दुर्गा, शिवानी,
ताकि वह भ्रमजाल बुनकर तुमको उलझा ले
दुष्ट का संहार करना किन्तु कर्कश हो न जाना
तुम स्वरों की स्रोत वीणावादिनी भी हो
शून्य के प्रासाद की सौदामिनी, लाड़ो
काम के सेवक की हो तुम यदि सनातन-सेविका तो
कामना रूपी महल की स्वामिनी भी हो
जो उदय होता है उस का अस्त निश्चित है
मेरी प्यारी, लाड़ली तुम भोर तो ही जगत की,
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