परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

कष्ट जब भीमकाय लगता है

 कष्ट जब भीमकाय लगता है
धैर्य उत्तम उपाय लगता है
 
तुम पिलाओ तो रस करेले का
मीठी अदरक की चाय लगता है 
 
एक नुक्कड़ भी था मुहल्ले में
अब तो वह लुप्तप्राय लगता है
 
न्याय की आस उससे क्या करनी
उसको अन्याय न्याय लगता है
 
वो जो निर्बल है और निर्धन भी
गाय सा निस्सहाय लगता है
 
कोई माने न माने मुझको तो
प्रेम स्वान्तः सुखाय लगता है

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