परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

Tuesday, 9 June 2026

कितना भी आभासी हो लेकिन भाता ही है

 कितना भी आभासी हो लेकिन भाता ही है
पचपन पार करो तो बचपन याद आता ही है
 
जब जब सावन आता है और गाती है कोयल
मन का पंछी भी अपने पर फैलाता ही है 
 
जब जब फागुन आता है और बजते हैं ढप ढोल
पागल मनुआ होली का फगुआ गाता ही है
 
फुल पर चलता ए सी भी सन्तुष्टि नहीं देता
पुरवइया का झोंका मन को ललचाता ही है
 
सुधियों की वर्षा होने पर भावों का निर्झर
कितना भी रोको नयनों से झर जाता ही है
 
ज्ञात सभी को है गूलर का फूल नहीं मिलना
फिर भी उसका मोह सभी को भरमाता ही है

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