बात अब ये समझ में आई है
मौन रहने में ही भलाई है
जिसके अधरों धरी है
बाँसुरिया
मैं ने उससे लगन लगाई है
रुक्मिणी को भले मिली हो सेज
प्रीत मीरा के हाथ आई है
मेरे सम्मुख कुबेर कुछ भी
नहीं
मेरा वैभव किशन कन्हाई है
मेरी कुटिया को भी करो पावन
टेर मैं ने भी तो लगाई है
वो ही सागर वो ही सरोवर भी
वो ही पर्वत है वो ही राई है
मैं ने उससे लगन लगाई है
प्रीत मीरा के हाथ आई है
मेरा वैभव किशन कन्हाई है
टेर मैं ने भी तो लगाई है
वो ही पर्वत है वो ही राई है
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