मात्र इतनी सी हमारी कामना है
जो नहीं पाया है उसको बाँटना
है
वेदना तो दिख रही है हर हृदय
में
बस हमें सम्वेदना को खोजना है
कोई जब रोके तुम्हें तो रुक
न जाना
वर्जना तो सर्जना की गर्जना है
जिसमें ना कहने का साहस आ
चुका हो
सच कहें तो वो भी इक वीरांगना है
व्योम से टपकी नहीं कोई
सफलता
हर सफलता साधकों की साधना है
आने ही वाली है अब वह रुत वसंती
अब तो बस अपनी जड़ों को सींचना है
हैं तो पागल पर हमें पागल न
कहना
बावलों को बावला कहना मना है
बस हमें सम्वेदना को खोजना है
वर्जना तो सर्जना की गर्जना है
सच कहें तो वो भी इक वीरांगना है
हर सफलता साधकों की साधना है
अब तो बस अपनी जड़ों को सींचना है
बावलों को बावला कहना मना है
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