सत्य तो ब्यौहार है
झूठ आविष्कार है
ये कोई नदिया नहीं
प्रेम पारावार है
उसकी नैया मत डुबा
वो तेरी पतवार है
जो कभी ब्यौहार था
अब वही व्यापार है
देख इससे दूर रह
मोह कारागार है
शम्भु से परिचय नहीं
फिर तो बंटाधार है
प्रेम पारावार है
वो तेरी पतवार है
अब वही व्यापार है
मोह कारागार है
फिर तो बंटाधार है
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