नृत्य-गायन कीजिए श्रीमान श्रेयस्कर यही है
मन-प्रबोधन
कीजिए श्रीमान श्रेयस्कर यही है
दिग्भ्रमित जग से उलझकर क्या
मिला है क्या मिलेगा
आत्मचिन्तन कीजिए श्रीमान श्रेयस्कर यही है
बल-नियोजन
श्रेष्ठ है या जल-नियोजन श्रेष्ठ है
यह विवेचन कीजिए श्रीमान श्रेयस्कर यही है
आपका अनुभव अमित है आपकी
मेधा अगम है
मार्गदर्शन कीजिए श्रीमान श्रेयस्कर यही है
जो अनादर कर रहे माता,
पिता, गुरुओं का,
उनका
बोध-वर्धन कीजिए श्रीमान श्रेयस्कर यही है
आत्मचिन्तन कीजिए श्रीमान श्रेयस्कर यही है
यह विवेचन कीजिए श्रीमान श्रेयस्कर यही है
मार्गदर्शन कीजिए श्रीमान श्रेयस्कर यही है
बोध-वर्धन कीजिए श्रीमान श्रेयस्कर यही है
No comments:
Post a Comment