अण्डकोष में यथा शिवत्व सर्वमान्य है
विश्व के विधान में ममत्व
सर्वमान्य है
हर दिशा, दशा, कथा, व्यथा, असार, सार
में
बुद्ध का प्रतीक बोधिसत्व सर्वमान्य है
बुद्ध का प्रतीक बोधिसत्व सर्वमान्य है
आज भी सनातनी द्विजत्व सर्वमान्य है
ब्रह्म-तत्व में निमग्न स्वत्व सर्वमान्य है
कौन है वो जिसका नायकत्व सर्वमान्य है
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