परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

नवल चन्द्रमा की धवल चन्द्रिका हो

 नवल चन्द्रमा की धवल चन्द्रिका हो
हॄदय-स्वामिनी तुम खुली पुस्तिका हो
 
जिसे पा लिया हो गयीं बस उसी की
तुम इस विश्व की श्रेष्ठतम प्रेमिका हो 
 
तुम आयीं तो कुटिया महल बन गयी है
मैं वो भाग्य हूँ जिसकी तुम लेखिका हो
 
निकटतम दिखे है जहाँ से गगन, तुम
सनातन भवन की वो अट्टालिका हो
 
मुझे दिव्य दर्शन तुम्हीं ने कराये
मैं दर्शक हूँ तुम मेरी दिग्दर्शिका हो
 
मैं किंचित गुणी हूँ गुणों से भरी तुम
सुमन-पात्र मैं तुम सुमन वाटिका हो
 
जो कल वज्र था अब द्रवित हो गया है
अहो रंजिके तुम शिला भंजिका हो

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