परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

प्रीत में हर बात को विपरीत कहते हैं सखी

 प्रीत में हर बात को विपरीत कहते हैं सखी
मन चुराता है उसे मनमीत कहते हैं सखी
 
रुक्मिणी से पूछ ले या राधिका से पूछ लो
प्रीत में तो हार को ही जीत कहते हैं सखी 
 
मेघदूतम की कहानी का यही तो सार है
हम विरह को भी मिलन का गीत कहते हैं सखी
 
तू हृदय की बात सुन संसार की बातें न सुन
लोग तो अनरीत को भी रीत कहते हैं
 
प्रेम जिससे हो गया उस जैसा कोई भी नहीं
छाछ हो तो भी उसे नवनीत कहते हैं सखी

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