अश्रुधारा ठहर न पायेगी
बाँध टूटा तो बाढ़ आयेगी
देख सौतन से कुछ नहीं कहियो
खींच कर ये ही पी को लायेगी
श्वास जैसी सखी नहीं कोई
संग आयी है संग जायेगी
इससे अमृत की आस मत रखना
प्रीत विषपान ही करायेगी
वास्तविकता से उसको क्या
लेना
अप्सरा स्वप्न ही दिखायेगी
माना सागर अनन्त है लेकिन
ओस की बूँद काम आयेगी
खींच कर ये ही पी को लायेगी
संग आयी है संग जायेगी
प्रीत विषपान ही करायेगी
अप्सरा स्वप्न ही दिखायेगी
ओस की बूँद काम आयेगी
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