परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

शबरी जैसों ने जिनको मीठा समझा है

 शबरी जैसों ने जिनको मीठा समझा है
रघुवर जैसों ने उनको ही आरोगा है
 
मैं शबरी जैसों के आश्रम की चींटी हूँ
मैं ने जूठन की जूठन का स्वाद लिया है 
 
भूल के भी रावण, बाली जैसे मत बनना
घर वाला बाहर वाले का हो जाता है
 
गौतम नारि अहिल्या तुम पाषाण नहीं हो
तुमने तो सच्ची निष्ठा का पक्ष रखा है
 
उस पल साक्षी भाव जिया था कौशल्या ने
समझ गयी थीं बेटा कुछ करने वाला है
 
गिनने बैठोगे तो गिनते रह जाओगे
रामायण इतनी गाथाओं की गाथा है

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