परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

Tuesday, 9 June 2026

स्वयं समर्पित होकर विस्मय पैदा करती है

 स्वयं समर्पित होकर विस्मय पैदा करती है
शक्ति स्वयं को शिव शंकर पर वारा करती है
 
नित्य नवीन प्रथाओं को अपनाया करती है 
सजा भुगत कर भी संसार सजाया करती है 
 
सावित्री अपनी निधि से अनजान नहीं फिर भी
श्री होकर भी यम से भिक्षा माँगा करती है
 
हहा! हहा! प्रारब्ध!! कि वैदेही जैसी नारी
राघव को लव-कुश दे कर खो जाया करती है
 
लोक-विरुद्ध हो उस का चण्डी बनना बस तब ही
गांधारी आँखों पर पट्टी बाँधा करती है
 
भारी मन से कहना पड़े तो भी सच ही कहना
सच्ची बात हमारे मन को हलका करती है

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