परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

Tuesday, 9 June 2026

किसलिए उपकार को उपकार बोलूँ

 किसलिए उपकार को उपकार बोलूँ
क्यों अपेक्षा की तुला पर प्रेम तोलूँ
 
एक युग से बैठा हूँ पलकें बिछाये
तुम जो आ जाओ तो मन के द्वार खोलूँ 
 
स्वप्न जो देखा है बस इतना सा है वह
कर लिए कर में तुम्हारे संग डोलूँ
 
जो अमर कर देता है दो प्रेमियों को
पात्र मिल जाये तो उस अमृत को घोलूँ
 
वह जिसे कहते हैं निद्रा है कहाँ वह
मिल सके तो मैं भी पल दो पल को सो लूँ
 
हूँ मनुज, अपराध मुझसे भी हुए हैं
आप गंगा बन सकें तो पाप धो लूँ

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