न तुमसे बैर करना है न झगड़ा ही बढ़ाना है
कहीं से दृष्टि ले आओ
तुम्हें दरपन दिखाना है
वे सेवक हैं अमावस के उन्हें
पूनम से क्या लेना
समझते क्यों नहीं हो तुम उन्हें तुमको थकाना है
ये सीधी बात चाहो तो समझ
सकते हो पल भर में
अरे घर फूँकने वालो हमें घर को बचाना है
प्रलोभन की शकर मीठी तो है
मिश्री नहीं लेकिन
ठहर कर सोचना भी है कि बस चलते ही जाना है
जो सोतों को जगाते हैं हमारा
दुख न समझेंगे
हमें ये कष्ट है जागे हुओं को भी जगाना है
समझते क्यों नहीं हो तुम उन्हें तुमको थकाना है
अरे घर फूँकने वालो हमें घर को बचाना है
ठहर कर सोचना भी है कि बस चलते ही जाना है
हमें ये कष्ट है जागे हुओं को भी जगाना है
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