धरा पर धर्म-रक्षा के सु-अवसर बन गये होते
दधीची मिल गये होते तो बज्जर
बन गये होते
न जाते द्वारिका, मथुरा में रह सकते थे मनमोहन
मगर कुछ शत्रु भी अन्दर ही अन्दर बन गये होते
मुझे बहुधा लगे है यदि नहीं
होते परम-क्रोधी
तो दुर्वासा सरोवर से समुद्दर बन गये होते
समय की धार से मिल कर नहीं
चल पाये थे चार्वाक
नहीं तो जाने कितनों से महत्तर बन गये होते
किसी उद्विग्न या विक्षिप्त
को पत्थर नहीं कहना
भरत-मुनि जड़ नहीं होते तो पत्थर बन गये होते
मगर कुछ शत्रु भी अन्दर ही अन्दर बन गये होते
तो दुर्वासा सरोवर से समुद्दर बन गये होते
नहीं तो जाने कितनों से महत्तर बन गये होते
भरत-मुनि जड़ नहीं होते तो पत्थर बन गये होते
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