परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

हम ना तो हैं कठपुतली ना रेस के घोड़े हैं

 हम ना तो हैं कठपुतली ना रेस के घोड़े हैं
जग मानसरोवर है हम हंसों के जोड़े हैं
 
बस तैरने में ही तुम जीवन न बिता देना
उड़ने के लिए पर भी भगवान ने जोड़े हैं 
 
जब जब मैं रुका तब तब गुरुदेव ने समझाया
बस चलता चला चल तू हर पन्थ पै रोड़े हैं
 
मत पूछ हवन कितने पुरखों ने थे करवाये
यह देख जतन कितने तेरे लिए छोड़े हैं
 
वह धानी चुनर हमने ओढाई मरुस्थल को
हाँ हमने ही पानी के धारे यहाँ मोड़े हैं
 
इस धरती पै मिलते हैं ऐसे भी महामानव
हैं जिनके वचन अमृत पर कर्म निगोड़े हैं

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