खिन्न हैं अवश्य किन्तु रुष्ट हैं न क्रुद्ध हैं
सूत्र जानकर भी सूत्रधार के
विरुद्ध हैं
वाक्य में भले ही कथ्य की
समग्रता नहीं
किन्तु प्रीत के पुनीत भाव तो विशुद्ध हैं
किन्तु प्रीत के पुनीत भाव तो विशुद्ध हैं
आजकल तो जाने कैसे-कैसे व्यक्ति बुद्ध हैं
बार-बार हस्तगत हुए परन्तु युद्ध हैं
आप ही करें जतन बस आप ही प्रबुद्ध हैं
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