जब भी उसको देखिए बिन बात भी रोता बहुत है
कोई माने या न माने किन्तु वो शाणा बहुत है
यह चटोरी जीभ ही भरमा रही है
हर किसी को
पेट भरने के लिए तो पाव भर आटा बहुत है
आप फूलों और फलों की बात ही
क्यों कर रहे हैं
वृक्ष हैं माता पिता और वृक्ष की छाया बहुत है
जानकी की वंशजाओ धर्म ध्वज
गिरने न देना
दुष्ट रावण के लिए तो एक ही तिनका बहुत है
आज भी सर्वत्र कुछ ऐसे पुरुष
भी हैं जगत में
जिनका कहना है कि राघव के लिए सीता बहुत है
पेट भरने के लिए तो पाव भर आटा बहुत है
वृक्ष हैं माता पिता और वृक्ष की छाया बहुत है
दुष्ट रावण के लिए तो एक ही तिनका बहुत है
जिनका कहना है कि राघव के लिए सीता बहुत है
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