पुनः योग वैसे बनाने ही होंगे
तलैया सरोवर बचाने ही होंगे
जो वटवृक्ष बनकर टिकें
पीढ़ियों तक
हमें ऐसे पौधे लगाने ही होंगे
कुटिलता का परिहार करना ही
होगा
मधुरता को आसन दिलाने ही होंगे
जो अन्तर बढ़ाते रहे हैं
निरन्तर
हमें वैसे मन्तर भुलाने ही होंगे
स्वर और व्यंजनों ने सजायी
है दुनिया
हमें अपने बालक पढ़ाने ही होंगे
सभी का सुधरना असम्भव है
लेकिन
कुछों को तो दरपन दिखाने ही होंगे
हमें ऐसे पौधे लगाने ही होंगे
मधुरता को आसन दिलाने ही होंगे
हमें वैसे मन्तर भुलाने ही होंगे
हमें अपने बालक पढ़ाने ही होंगे
कुछों को तो दरपन दिखाने ही होंगे
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