मानसिक भावों को शब्दों में अनूदित कीजिए
इष्ट है सुस्पष्ट तो
प्रस्ताव पारित कीजिए
चन्द्र हैं तो चातकों पर
प्रीत की वर्षा करें
सूर्य हैं यदि आप तो कण-कण प्रकाशित कीजिए
सूर्य हैं यदि आप तो कण-कण प्रकाशित कीजिए
पन्थ हैं यदि आप तो सन्मार्ग
से जाकर जुड़ें
हैं पथिक तो पन्थ पर पदचिन्ह अंकित कीजिए
गीत हैं तो विश्व के कल्याण
की बातें करें
प्रीत हैं तो प्रीत-मय संसार निर्मित कीजिए
हैं रसिक तो बाँटिए रस, हैं
जो रस तो वश करें
और यदि उद्यान हैं तो जग सुगन्धित कीजिए
हैं पथिक तो पन्थ पर पदचिन्ह अंकित कीजिए
प्रीत हैं तो प्रीत-मय संसार निर्मित कीजिए
और यदि उद्यान हैं तो जग सुगन्धित कीजिए
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