सुरम्य सुन्दर उदार नैना
परन्तु अबतक कुमार नैना
हम उसके रूपों को देख पाएं
सो दे रहा है उधार नैना
कहीं धरा हैं कहीं गगन हैं
कहीं हैं झरने की धार नैना
महत्व हर अंग का है लेकिन
करेंगे नदिया के पार नैना
ये ही तो मर्याद का वसन हैं
करो नहीं तार तार नैना
वो क्या समझ पायेगा हृदय को
हुए नहीं जिसके चार नैना
सो दे रहा है उधार नैना
कहीं हैं झरने की धार नैना
करेंगे नदिया के पार नैना
करो नहीं तार तार नैना
हुए नहीं जिसके चार नैना
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