ओढ़कर धानी चुनर हिन्दी गजल
बढ़ रही सन्मार्ग पर हिन्दी
गजल
विश्वकविता ने चुना जिस पन्थ
को
है उसी पर अग्रसर हिन्दी गजल
भीड़ ने जिस ‘पन्थ’ को
‘रस्ता’ कहा
लिख रही उसको ‘डगर’ हिन्दी गजल
हत हुई गरिमा तो मन आहत हुआ
उठ पड़ी हो कर मुखर हिन्दी गजल
देवभाषा की सलोनी संगिनी
मूलस्वर में है प्रवर हिन्दी गजल
है उसी पर अग्रसर हिन्दी गजल
लिख रही उसको ‘डगर’ हिन्दी गजल
उठ पड़ी हो कर मुखर हिन्दी गजल
मूलस्वर में है प्रवर हिन्दी गजल
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