सच कहता हूँ मन का कोना कोना सुरभित हो जाता है
तुम से मिलता हूँ तो मेरा मन
आनन्दित हो जाता है
जो मिश्री से भी मीठी हों
ऐसी बातें ही करिए बस
अच्छा हो ब्यौहार तो सबके मन पर अंकित हो जाता है
समरसता ठुकराने वाले पूजित
हो जाते हैं वंचित
और इसे अपनाने वाला वंचित पूजित हो जाता है
करुणामय अनुराग भरी बस एक
पटकनी के लगते ही
हट्टा कट्टा पहलवान भी पल भर में चित हो जाता है
जो भी आशा अभिलाषा है कम से
कम शब्दों में कह दो
लम्बी लम्बी सुनकर सुनने वाला लम्बित हो जाता है
अच्छा हो ब्यौहार तो सबके मन पर अंकित हो जाता है
और इसे अपनाने वाला वंचित पूजित हो जाता है
हट्टा कट्टा पहलवान भी पल भर में चित हो जाता है
लम्बी लम्बी सुनकर सुनने वाला लम्बित हो जाता है
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