जो अहोभाव से भरा होगा
उसका मन पारिजात सा होगा
व्यक्तियों से लड़ेंगे कबतक
हम
मानसिकता से जूझना होगा
अंश करुणा का घट रहा पल पल
सर्प का दंश और क्या होगा
स्वार्थ केवल गरल नहीं
श्रीमान
ये सुधा भी है मानना होगा
क्या समाधान तब करेंगे हम
बिन्दु जब सिन्धु बन गया होगा
है पुराना धनुष तो क्या कीजै
लक्ष्य तो हमको साधना होगा
पट चुराकर खिसक लिया है जो
आपका ही कोई सखा होगा
मानसिकता से जूझना होगा
सर्प का दंश और क्या होगा
ये सुधा भी है मानना होगा
बिन्दु जब सिन्धु बन गया होगा
लक्ष्य तो हमको साधना होगा
आपका ही कोई सखा होगा
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