परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

प्राण तो आप हैं मात्र काया हूँ मैं

 प्राण तो आप हैं मात्र काया हूँ मैं
तात श्री आप ही की तो छाया हूँ मैं
 
ये तनिक सा कदाचित जो छाया हूँ मैं
आपके आशिषों में समाया हूँ मैं 
 
कामधेनुस्सदृश कल्पवृक्षी  फसल
आप ने बोयी सो काट पाया हूँ मैं
 
क्यों न कंचन सदृश हो ये जीवन मेरा
आप के स्वेद से नित नहाया हूँ मैं
 
आप का चित्त जिसने चकित कर दिया
मेरा सौभाग्य है ऐसी माया हूँ मैं
 
होलिका भी जिसे फूँक पायी नहीं
ऐसा बड़भागी प्रह्लाद था, या हूँ मैं
 
अब समझ आ रहा है कि मेहराब था
मुझको भ्रम हो गया था कि पाया हूँ मैं

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