सन्तों की बानी जैसा बन
मीरा दीवानी जैसा बन
तोड़ के बन्धन बाहर आ जा
झरनों के पानी जैसा बन
कंकर कंकर तेरा ही है
बाबा बर्फानी जैसा बन
मन में मिसरी घोलने वाली
मीठी गुड़ धानी जैसा बन
देश जहाँ प्रीतम का डेरा
उसकी रजधानी जैसा बन
अज्ञानी मत बन ओ पगले
केवल अज्ञानी जैसा बन
झरनों के पानी जैसा बन
बाबा बर्फानी जैसा बन
मीठी गुड़ धानी जैसा बन
उसकी रजधानी जैसा बन
केवल अज्ञानी जैसा बन
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