मीत को मनाओगे तब हॄदय द्रवित होगा
मन से मन मिलाओगे तब हृदय
द्रवित होगा
जाल में किसी को जब तुम
तड़पता देखोगे
और बचा न पाओगे तब हृदय द्रवित होगा
कोई जब पुकारे पर भाग्यवश
तभी उससे
दूर होते जाओगे तब हृदय द्रवित होगा
आप अपने जीवन से काम, क्रोध, लिप्सा
और
स्वार्थ को घटाओगे तब हृदय द्रवित होगा
इन दिनों भले ही यह सबको
चाहिए फिर भी
मन से धन हटाओगे तब हृदय द्रवित होगा
और बचा न पाओगे तब हृदय द्रवित होगा
दूर होते जाओगे तब हृदय द्रवित होगा
स्वार्थ को घटाओगे तब हृदय द्रवित होगा
मन से धन हटाओगे तब हृदय द्रवित होगा
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