सोच समझ कर डग धरना ही श्रेयस्कर है
ऊपर वाले से डरना ही
श्रेयस्कर है
लक्ष्मी आयी है तो नहाने
क्यों जायें हम
आगत का स्वागत करना ही श्रेयस्कर है
हम सब पर्वत जैसे पुरखों का
संचय हैं
झरनों के जैसे झरना ही श्रेयस्कर है
प्रहरी हो कर भी जो वार करें
स्वामी पर
ऐसे दुष्टों का मरना ही श्रेयस्कर है
जीवन कितनी भी कड़वाहट को
बरसाये
मिश्री के गुण अनुसरना ही श्रेयस्कर है
आगत का स्वागत करना ही श्रेयस्कर है
झरनों के जैसे झरना ही श्रेयस्कर है
ऐसे दुष्टों का मरना ही श्रेयस्कर है
मिश्री के गुण अनुसरना ही श्रेयस्कर है
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