मीरा और गिरिधर जैसी गरिमा से छुआ करो
मन की आशा को मन की भाषा से
छुआ करो
जैसे स्पर्श किया कान्हा ने
श्री राधे का मन
छुआ करो तो वैसी मर्यादा से छुआ करो
उसके रंग-महल की कुंजी उसकी
चौखट है
उसकी चौखट को सच्ची श्रद्धा से छुआ करो
अमृत कोई द्रव्य नहीं जो
अंजुलि में आ जाय
अमृत को छूना हो तो प्रज्ञा से छुआ करो
सुन्दरता भी छुईमुई जैसी ही
होती है
सुन्दरता को नयनों की भाषा से छुआ करो
चिड़िया जैसे डुबकी मारी और
निकल आये
गहरे सागर को अपनी समिधा से छुआ करो
अन्तस के अनुरागी तो अनुभूति
कराते हैं
अन्तस को छूना हो तो आभा से छुआ करो
छुआ करो तो वैसी मर्यादा से छुआ करो
उसकी चौखट को सच्ची श्रद्धा से छुआ करो
अमृत को छूना हो तो प्रज्ञा से छुआ करो
सुन्दरता को नयनों की भाषा से छुआ करो
गहरे सागर को अपनी समिधा से छुआ करो
अन्तस को छूना हो तो आभा से छुआ करो
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