परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

और सबकुछ तो पढ़ लिया उसने

 और सबकुछ तो पढ़ लिया उसने
ढाई आखर नहीं पढ़ा उसने
 
मित्र से पहले प्रिय भी बोला था
शब्द पहला नहीं सुना उसने 
 
पीर को पीर ही कहेगा वह
प्रेम का रस नहीं चखा उसने
 
मुझको मँझधार में उतार दिया
मुझ पै उपकार ही किया उसने
 
अब स्वयं को सँवार लूँगा मैं
मुझको दरपन दिखा दिया उसने

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