राजनीति का प्रहसन क्या विचित्र प्रहसन है
कल तलक जो वर्जित थे आज उनका
वन्दन है
किस पै टिप्पणी करिए हर किसी
के मस्तक पर
भिन्न-भिन्न हो कर भी एक जैसा चन्दन है
सबके काम होते हैं सबको दाम
मिलते हैं
मीटिंगों में मंगल है मीडिया में क्रन्दन है
अब तो ऐरे-गैरे
भी सभ्यता सिखाते हैं
लाज पर बुढापा है धृष्टता पै जोबन है
भिन्न-भिन्न हो कर भी एक जैसा चन्दन है
मीटिंगों में मंगल है मीडिया में क्रन्दन है
लाज पर बुढापा है धृष्टता पै जोबन है
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