सृष्टि को दृष्टि से परे मत बोल
कर्म को राम आसरे मत बोल
गीत जो चाहे वो सुना लेकिन
अन्तरों वाले अन्तरे मत बोल
कोष यदि हैं भरे तो बोल भरे
रिक्त हैं तो भरे भरे मत बोल
सच है सच बोल होते हैं कड़वे
किन्तु इतने खरे खरे मत बोल
धर्म को धर्म रहने दे प्यारे
हर विषय पर हरे हरे मत बोल
या तो उपहार-दान ले ही मत
ले लिया तो अरे अरे मत बोल
अन्तरों वाले अन्तरे मत बोल
रिक्त हैं तो भरे भरे मत बोल
किन्तु इतने खरे खरे मत बोल
हर विषय पर हरे हरे मत बोल
ले लिया तो अरे अरे मत बोल
No comments:
Post a Comment