जहाँ सम्वेदना सम्भव नहीं है
वहाँ सम्भावना सम्भव नहीं है
नियति की वर्जना सम्भव नहीं
है
जड़ों को त्यागना सम्भव नहीं है
स्वयं जगदीश की हो या मनुज
की
सतत आराधना सम्भव नहीं है
स्वयं ही आकलन कर लो वहीं से
यहाँ से याचना सम्भव नहीं है
भले ही शीत की ऋतु हो महोदय
निरन्तर तापना सम्भव नहीं है
पहर-भर
नींद सबको चाहिए ही
अहर्निश जागना सम्भव नहीं है
जड़ों को त्यागना सम्भव नहीं है
सतत आराधना सम्भव नहीं है
यहाँ से याचना सम्भव नहीं है
निरन्तर तापना सम्भव नहीं है
अहर्निश जागना सम्भव नहीं है
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