रास में रमना है बस, रस में रमण करते नहीं
जो बना करते हैं वैसा आचरण
करते नहीं
उसके वाक्यों का निरन्तर
करते हैं उल्लेख, पर
बुद्ध के बन्धुत्व से शिक्षा ग्रहण करते नहीं
इक विचार ऐसा भी आता है कि
क्या करते जनक
राम यदि शिवचाप का खंडीकरण करते नहीं
हम उसे गन्धर्व-परिणय कहते
हैं जिसमें रसिक
भोग तो करते हैं पर पाणिग्रहण करते नहीं
ज्ञात है हर एक क्षण का मोल
क्या है फिर भी हम
व्यय अहर्निश कर रहे हैं संग्रहण करते नहीं
बुद्ध के बन्धुत्व से शिक्षा ग्रहण करते नहीं
राम यदि शिवचाप का खंडीकरण करते नहीं
भोग तो करते हैं पर पाणिग्रहण करते नहीं
व्यय अहर्निश कर रहे हैं संग्रहण करते नहीं
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