मीरा और गिरिधर जैसी गरिमा से छुआ करो
मन की आशा को मन की भाषा से
छुआ करो
जैसे स्पर्श किया कान्हा ने
श्री राधे का मन
छुआ करो तो वैसी मर्यादा से छुआ करो
कांटों को भी कोमल हाथों से
ही हटाते हैं
अतः ऊष्माओं को भी सुषमा से छुआ करो
हर आतम को परमातम की छाया
कहते हैं
आडम्बर से नहीं इन्हें श्रद्धा से छुआ करो
चित्त कमल जैसा ही कोमल होता
है प्रियवर
निर्ममता से नहीं इसे ममता से छुआ करो
मार्ग दिखा देगी तृष्णा पर
लक्ष्य चाहिए तो
प्रगतिपन्थ को केवल मृगतृष्णा से छुआ करो
छुआ करो तो वैसी मर्यादा से छुआ करो
अतः ऊष्माओं को भी सुषमा से छुआ करो
आडम्बर से नहीं इन्हें श्रद्धा से छुआ करो
निर्ममता से नहीं इसे ममता से छुआ करो
प्रगतिपन्थ को केवल मृगतृष्णा से छुआ करो
No comments:
Post a Comment