परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

उस अलौकिक जोत को कोई बुझा सकता नहीं

 उस अलौकिक जोत को कोई बुझा सकता नहीं
प्रेम के अस्तित्व को कोई मिटा सकता नहीं
 
एक ही अन्तस है मेरा जो तुम्हें दिखला चुका
चीर कर निज वक्ष को फिर-फिर दिखा सकता नहीं 
 
वह तो द्वापर था महोदय आज भी यह सत्य है
गोपियों को कोई भी उद्धव पढ़ा सकता नहीं
 
आपसे अनुराग है तो है छुपाऊँ किसलिये
तन छुपा सकता हूँ लेकिन मन छुपा सकता नहीं
 
मान्यवर जी आप मदिरा को भले अमृत कहें
अपने हाथों आप को मैं विष पिला सकता नहीं

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