परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

मान्य करता हूँ पिता बनना अहम सौभाग्य है

 मान्य करता हूँ पिता बनना अहम सौभाग्य है
किन्तु बेटी का पिता बनना परम सौभाग्य है
 
दान करना यों तो हर श्रेणी में है सौभाग्य ही
किन्तु कन्यादान करना उच्चतम सौभाग्य है 
 
पुत्रवधुएँ भी तनूजा से नहीं होती हैं कम
चूड़ियों की इनकी खनखन में अगम सौभाग्य है
 
जैसी होवै धारणा वैसी बने अवधारणा
दृष्टि तय करती है सम है या विषम सौभाग्य है
 
मित्र यह कलियुग है भरमाना ही है इसका स्वभाव
और इस युग में बचा लेना धरम सौभाग्य है

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