प्राणी को प्राणी ही कहना जलचर थलचर मत कहना
जिसके मन में प्रेम भरा हो
उसको पत्थर मत कहना
निश्चित ही कंकर कंकर में
शंकर बसते हैं फिर भी
जिस कण में कल्याण नहीं हो उसको शंकर मत कहना
मित्र विराट वही है जो अणु
जैसा भी बन सकता हो
गागर में न समाये उस सागर को सागर मत कहना
उसे धरा कहना जिसमें धारण
करने की क्षमता हो
जिसकी सीमाएं सीमित हों उसको अम्बर मत कहना
हमको मत भरमाओ उद्धव कान्हा
ने भी बोला था
राधा को बिसरा दूँ तो गिरिधर को गिरिधर मत कहना
जिस कण में कल्याण नहीं हो उसको शंकर मत कहना
गागर में न समाये उस सागर को सागर मत कहना
जिसकी सीमाएं सीमित हों उसको अम्बर मत कहना
राधा को बिसरा दूँ तो गिरिधर को गिरिधर मत कहना
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