रंग बरसाती विविधरंगी मनीषा को नमन
व्यक्ति का व्यक्तित्त्व
विकसाती मनीषा को नमन
वीर माता अंजनी जैसी मनीषा
को नमन
शेष माता रोहिणी जैसी मनीषा को नमन
लोकहित के हेतु जंघा पर
सहर्ष आसित हुईं
युग सनेही पार्वती जैसी मनीषा को नमन
प्रेम के पर्याय को जन कर भी
जो प्यासी रही
उस अनन्या देवकी जैसी मनीषा को नमन
नाथ का सम्बल बनी सन्तान का
भी बल बनी
ऐसी उद्भट जानकी जैसी मनीषा को नमन
नाथ के सम्मान के हित साथ
छोड़ा तात का
दक्ष की पुत्री सती जैसी मनीषा को नमन
जिसके प्रश्नों से सुसज्जित
ब्रह्मदारण्यक हुआ
ऐसी विदुषी गारगी जैसी मनीषा को नमन
न्याय वर्गोत्तम किया
प्रतिकार अत्युत्तम किया
ऐसी मण्डन-मोहिनी जैसी मनीषा को नमन
मनीषा – बुद्धि, सोच; मण्डन
मोहिनी – मण्डन मिश्र की पत्नी जिन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य जी से वार्तालाप किया था
उन के लिए प्रयुक्त सम्बोधन
शेष माता रोहिणी जैसी मनीषा को नमन
युग सनेही पार्वती जैसी मनीषा को नमन
उस अनन्या देवकी जैसी मनीषा को नमन
ऐसी उद्भट जानकी जैसी मनीषा को नमन
दक्ष की पुत्री सती जैसी मनीषा को नमन
ऐसी विदुषी गारगी जैसी मनीषा को नमन
ऐसी मण्डन-मोहिनी जैसी मनीषा को नमन
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