दूसरा पहर नहीं विहान के समान है
और यह विहान हर निदान के
समान है
नगर-नगर
डगर-डगर पै इसकी जोत जल रही
को’यले का मान सूर्य मान के समान है
बम बनाये और हिरोशिमा को
नष्ट कर दिया
दुष्ट का तो ज्ञान भी मसान के समान है
श्रेष्ठ है परन्तु कोई ध्यान
दे नहीं रहा
सामवेद अब अरण्य गान के समान है
आपकी ही भाँति आपका सनेह भी
सजन
लुप्त है परन्तु विद्यमान के समान है
को’यले का मान सूर्य मान के समान है
दुष्ट का तो ज्ञान भी मसान के समान है
सामवेद अब अरण्य गान के समान है
लुप्त है परन्तु विद्यमान के समान है
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