यातना सी यातना है
बात करना भी मना है
अपनी हो या हो परायी
वेदना तो वेदना है
प्रेम है तो कर समर्पण
कामना तो याचना है
चाहे मिट्टी में दबा दो
गन्ध को तो फैलना है
तुम अभी पर्वत चढ़े हो
सिन्धु को भी लाँघना है
मत इसे आदेश कहिए
यह हमारी प्रार्थना है
वेदना तो वेदना है
कामना तो याचना है
गन्ध को तो फैलना है
सिन्धु को भी लाँघना है
यह हमारी प्रार्थना है
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