परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

क्षितिज की भाँति वह भी कल्पना ही है

 क्षितिज की भाँति वह भी कल्पना ही है
हमें तो फिर भी उसको खोजना ही है
 
भले रतिया बिता आना पर आ जाना
हमारा क्या हमें तो जागना ही है 
 
भले ही प्रेम का आभास भर मिल जाय
किसी खूँटी पै ये मन टाँगना ही है
 
किसी की वासना अधिकार कहलाये
किसी की कामना को भी मनाही है
 
वो बरसाती नदी इतरा ले कितना भी
समय आने पै उसको सूखना ही है
 
ये माया, मोह, मद, मत्सर उड़ें कैसे
ये वे तोते हैं जिनको पालना ही है

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