कौन सी उर्दू गजल है कौन सी हिन्दीगजल
पूछने पर बुद्धि बोली यह
कँवल है वह कमल
एक तो नुक़्ते का अन्तर दूसरा
उच्चार का
नक्ल है जो रेखता में, हिन्दवी में है नकल
भेद शब्दों का है केवल अर्थ
में अन्तर नहीं
हानि दौनों ही करेंगे जह्र पीजै या गरल
आप इसे आग्रह न समझें बात है
सिद्धान्त की
शुक्ल को लिक्खो सुकल तो शक्ल को लिक्खो सकल
और भी कुछ बिन्दु हैं
संक्षेप में लेकिन गुरू
भाव करुणा का न हो तो क्या गजल और क्या गजल
नक्ल है जो रेखता में, हिन्दवी में है नकल
हानि दौनों ही करेंगे जह्र पीजै या गरल
शुक्ल को लिक्खो सुकल तो शक्ल को लिक्खो सकल
भाव करुणा का न हो तो क्या गजल और क्या गजल
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