निरन्तर सद्गुणों का उन्नयन करते हुए रघुवर
यती बन कर जिये पल-पल
जतन करते हुए रघुवर
सदा ही सज्जनों से संगमन
करते हुए रघुवर
प्रजा के प्रिय बने जीवन, हवन करते हुए रघुवर
महामानव तो कहलाए ही गौतम-नारि-उद्धारक
सहज मानव भी कहलाए रुदन करते हुए रघुवर
भले ही आप के पावन-चरन
भू पर सुशोभित थे
लजाते थे गगन को वन-गमन करते हुए रघुवर
वे दण्डकवन की झड़पें हों कि
हो संग्राम लंका का
सृजन भी कर रहे थे निर्दलन करते हुए रघुवर
स्वयं सिरमौर बनने को कोई
सीमा नहीं लाँघी
बने मर्यादा पुरुषोत्तम नमन करते हुए रघुवर
नवीन अब लोग जो बोलें सों
बोलें सत्य ये ही है
चुना करते थे सबका हित चयन करते हुए रघुवर
प्रजा के प्रिय बने जीवन, हवन करते हुए रघुवर
सहज मानव भी कहलाए रुदन करते हुए रघुवर
लजाते थे गगन को वन-गमन करते हुए रघुवर
सृजन भी कर रहे थे निर्दलन करते हुए रघुवर
बने मर्यादा पुरुषोत्तम नमन करते हुए रघुवर
चुना करते थे सबका हित चयन करते हुए रघुवर
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