कामना अव्यक्त थी तो व्यक्त करते
और इस आसक्त को अनुरक्त करते
आपने आँखें तरेरीं हट गये हम
और क्या उपचार त्यागे-त्यक्त करते
और क्या उपचार त्यागे-त्यक्त करते
हम तो कण्ठी-बन्द सेवक थे सनातन
एक सेवक को पुनः क्या भक्त करते
किस तरह अव्यक्त को हम व्यक्त करते
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