परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

नदी के आर देखो पार देखो

 नदी के आर देखो पार देखो
समझ में आ सके तो सार देखो
 
सवा के पौन तो बजने नहीं हैं
घड़ी को तुम भले सौ बार देखो 
 
विजेताओं का अभिनन्दन किया है
हमारी हार का ब्यौहार देखो
 
धरा माता है अनदेखी करेगी
गगन की दृष्टि से संसार देखो
 
तनिक पकवानों की चर्चा हुई है
टपकने लग गयी हैं लार देखो
 
उसे इस ठौर आ जाना था अबतक
कहाँ ठहरी हुई है धार देखो

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